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पहले सेना से रिटायर होने वाले कुत्ते को गोली मार दी जाती थी, लेकिन मोदी जी नें बदल दी ये प्रथा

धरती पर हर एक जीव-जंतु को अपनी जिंदगी जीने का पूरा हक है. किसी भी इंसान के पास यह हक नही है कि वो प्रकृति के खिलाफ जाकर उस जीव की जान ले.

भारत में बहुत से नियम-कानून ऐसे हैं जिनको बदलने की सख्त आवश्यकता है. क्योंकि की कहीं न कहीं ये इंसानों और जीव जंतुओं के जीवन को प्रभावित कर रहे हैं. भारत की सेना के अगर बात की जाए तो, भारत की सेना विश्व की सबसे श्रेष्ठ सेनाओं मेसे एक है. भारत की सेना नें हर बार भारत की सीमाओं की रक्षा करते हुए अपने जवान खोए हैं, और बॉर्डर पर लड़ाई लड़ते हुए हर बार दुश्मन देशों को धूल भी चटाई है. लेकिन भारत की सेना में अंग्रेजों के जमाने से कुछ ऐसे नियम-कानून चले आ रहें है जिसे कमसे कम भारत के लोग तो बर्दाश्त नही कर सकते, पर भारत की सेना को इन कानूनों को निभाना पड़ रहा है, क्योंकि उन कानूनों को सरकार नें कभी बदला ही नही, और भारत की सेना को भी आर्मी से रिटायर कुत्तों को गोली मार देनी पडती थी.

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मजबूरन, खुद प्यार से पाले हुए ट्रेंड कुत्तों को सेना को रिटायरमेंट के बाद गोली मार देनी पडती थी.

कोई भी सेना का जवान असूलों-नियमों से बंधा हुआ होता है. सेना में एक अलग से टुकड़ी होती है, जिसे “डॉग स्क्वायड” कहा जाता है. इस टुकडी में लेब्राडोर,जर्मन शेफर्ड जैसे कुत्तों को पाल कर उन्हें ट्रेनिंग दी जाती है. इसमें आतंकवादियों को पकड़ना, नशीले पदार्थों खोजना, बम्ब खोजना आदि शामिल होता है. इन कुत्तों के लिए सरकार स्पेशल ट्रेनर्स रखती है ,और इनके बढिया खाने और रहने का इंतेजाम भी किया जाता है. सेना के जवान इनको बहुत प्यार से पालते हैं लेकिन, जब कोई भी डॉग सेना से रिटायर होता है, तो उसके लिए पार्टी की जाती है उसे बढिया खाना दिया जाता है, और उसके बाद उसे गोली मारकर मार दिया जाता था.

 

रिटायरमेंट के बाद कुत्ते को गोली मारकर मार देने के पीछे क्या कारण था ?

दसअसल सेना के कुत्ते पूरी तरह से ट्रेंड होते हैं. सेना का कोई भी कुत्ता बम्ब ढूंढने , नशा पकडने ओर आतंकी से लड़ने के काबिल होता है. वो सेना और ट्रेनिंग सेंटर के रास्तों से भी वाकिफ होता है. अगर किसी भी कुत्ते को ऐसे ही रिटायरमेंट के बाद छोड दिया जाए और वो किसी गलत इंसान के पास पहुंच जाए, तो यह सेना और आम जनता के लिए हानिकारक हो सकता है, इसलिए उसे मार दिया जाता था. भारत देश की सरकारों ने अंग्रेजों के बनाये हुए इस नियम को अपना रखा था, इसको रोकने के बारे में कभी प्रयास नही किया गया.

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भाजपा की मोदी सरकार नें किया इस नियम को खत्म किया, और 2015 के बाद से सेना के किसी भी कुत्ते को गोली नही मारी जाती.

इस मामले पर मोदी सरकार सत्ता में आते ही, एक निति तैयार करने में लग गई थी, और यह मामला हाईकोर्ट में भी था. पशु क्रूरता कानून 1960 के अनुसार यह एक अपराध भी माना गया है. अब इन कुत्तों को मारने पर रोक लगा दी गई है. सेना के अफसर के अनुसार, अब किसी भी कुत्ते को गोली नही मारी जाती और इन्हें एक अलग प्रकार के ट्रेनिंग सेंटर में रखा जाता है. दूसरा विकल्प इन कुत्तों को अडॉप्ट भी करवाया जा रहा है.

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