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ये है भारतीय आर्मी की खास सेना टुकड़ी, अमरीका से लेकर रूस तक चाहता है, ऐसी सेना हमारे पास भी हो

भारत देश तब तक सुरक्षित है, जब तक चीन-पाक की सीमा पर भारतीय आर्मी के जवान ड्यूटी पर तैनात हैं. भारतीय सेना से हर बडा मुल्क प्रेरणा लेता आया है.

भारत देश की अगर बात की जाए तो, यह अपने बाशिंदों को सबसे ज्यादा आजादी से रहने की इजाज़त प्रदान करता है. लेकिन इसी आजादी का भारत के लोग और राजनैतिक पार्टियां गलत फायदा उठाती हैं. सबसे ज्यादा ईमानदारी और सम्मान की नोकरी की अगर बात की जाए तो वो है ‘आर्मी, लेकिन आर्मी को भी बुरा भला कहने में लोग जरा सा भी गुरेज नही करते. जैसे सेना अध्यक्ष ‘जर्नल बिपिन रावत’ जी को कांग्रेस पार्टी के नेता द्वारा ‘गली का गुंडा कहना’. सेना को ‘बलात्कारी’ और देश को तोडने वालों को कांग्रेस पार्टी का समर्थन मिलना, और कोर्ट में इन्हें कोई सजा ना मिलना. यह सब एक सेना के जवान की मेहनत पर पानी फेरने की कोशिशें होती हैं. लेकिन सेना के जवान फिर भी अपना फर्ज अदा करने से पीछे नही हटते.

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भारत की सेना में इतनी मजबूत टुकड़ियां भी है, की हर कोई देश ऐसी ही टुकड़ियों को अपनी सेना में शामिल करना चाहता है. ऐसी ही एक खास टुकडी के बारे में बताने जा रहे हैं. जो बहुत सी मुश्किलों का सामना करते हुए देश रक्षा करते हैं, जिनके बारे में हम बताने जा रहे हैं.

1. सैनिकों के लिए सबसे बडी मुश्किल है वहां की सर्दी और बर्फबारी.

भारत के निचले इलाकों के लोगों को जब 4-5 डिग्री की सर्दी झेलनी पड़ जाए तो वो बिस्तर से बाहर नही निकलते, स्कूलों की छुट्टियां हो जाती हैं. लेकिन भारत के ये विशेष जवान “सियाचिन ग्लेशियर” में चीन-पाकिस्तान की सीमा पर -10 डिग्री से -70 डिग्री के ठंडे तापमान और बर्फबारी में पेट्रोलिंग करते हैं. मात्र 15 सैकिंड में शरीर का कोई भी हिस्सा जो नंगा हो , वह सुन्न पड जाता है. जवान बिना दस्तानों के अगर बंदूख के ट्रिगर पर उंगली लगाए, तो वो ट्रिगर के साथ ही चिपक जाती है.

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2. 5400 मीटर की ऊंचाई पर ना तो नींद आती है, न भूख लगती है, दिमाग सुन्न होने लगता है.

सियाचीन मोर्चा, दुनिया का सबसे ऊंचा आर्मी मोर्चा है. यहां 5400 मीटर की ऊंचाई पर भारतीय आर्मी तैनात है. ज्यादा ऊंचाई होने की वजह से यहां ऑक्सीजन की मात्रा सिर्फ 10% रह जाती है. कम ऑक्सिजन कि वजह से जवानों को नींद नही आती और ना ही भूख लगती है. जवान का वजन भी तेजी से कम होने लगता है. यहां दांतों की सफाई करने वाला टूथपेस्ट भी जम जाता है. लेकिन इन सब परेशानियों का हवाला देकर कोई भी जवान ड्यूटी नही छोड़ सकता, उसे करीब 90 दिन सियाचीन में ड्यूटी देनी ही होगी.

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3. ताजा खाना नसीब नही होता.

सियाचीन में जवानों को खाना निचले इलाकों से बनाकर हेलीकॉप्टर द्वारा सप्लाई किया जाता है. इसी वजह से इन्हें एक दम फ्रेश बना हुआ और गर्म खाना नसीब नही होता. अगर सेना के जवानों को कोई भी फल दिया जाए तो, वो सर्दी में जम कर एक दम पत्थर जैसा हो जाता है, जैसे कि सेब ओर संतरा आदि.

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4. एवलांच और बर्फीले तूफान से खतरा

भारत के बहुत से जवान सियाचिन में एवलांच की वजह से शहीद हुए हैं. वहां बर्फीला तूफान लगभग 3 हफ्ते तक भी चलता रहा सकता है. इस दौरान तापमान -70 डिग्री तक चला जाता है, करीब 40 फिट मोटी बर्फबारी भी होती है. सेना को इन सबसे लडना होता है और अपने कैम्प बचाने होते हैं.

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