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400 वर्ष तक बर्फ के नीचे था यह मंदिर, आज यह केदारनाथ धाम के नाम से जाना जाता है

हिंदुस्तान की सभ्यता सनातनी सभ्यता से भरपूर है. भारत के मंदिर विश्व में सबसे पुराने करीब हजारों साल पुराने हैं.

हिन्दू धर्म विश्व का सबसे पुराना धर्म है. भारत में हर रोज कोई ना कोई ऐसी चीज सामने आ रही है जो कहीं ना कहीं से हिंदू धर्म से जुडी हुई है. ये चीजें भारत ही नही भारत से बाहर कंबोडिया से लेकर अरब मुल्कों तक पाई गई हैं. अगर से सबसे ज्यादा धामों की बात की जाए तो वो भी हिंदू धर्म में ही हैं. दुनिया का सबसे बडा हिंदू मंदिर भारत में नही, बल्कि कंबोडिया में है जिसको अंकोरवाट के नाम से जाना जाता है.

भारत में हिंदूओ के कुल 12 ज्योतिलिंग हैं. ज्योतिर्लिंग मतलब 12 मुख्य महादेव के शिवलिंग हैं. जिनमे से एक मुख्य ज्योतिर्लिंग है,’केदारनाथ’ केदारनाथ धाम उत्तराखंड में स्थित है. यहां महादेव का साक्षात रूप वास करता है. यह समुद्र तल से करीब 22,000 फिट की ऊंचाई पर है . यह 6 फिट ऊंचे चबूतरे पर बना हुआ है.

ऐसा माना गया है कि, यह मंदिर 400 साल तक बर्फ के नीचे दबा रहा.

जियोलॉजिकल विभाग के वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है कि, यह मंदिर करीब 400 साल तक बर्फ के नीचे दबा हुआ था. मंदिर को को इतने ठोस तरीके से बनाया गया है कि, बर्फ के नीचे दबे रहने की वजह से भी इसे कोई क्षति नही पहुंची. लेकिन जब बर्फ वहां से खत्म हुई तो वहां कुछ ना कुछ निशान जरूर रह गए. करीब 13वीं से 17वी शताब्दी में भयानक हिमयुग आया था जो करीब 400 साल तक चलता रहा, इसी दौरान केदारनाथ समेत हिमालय की बहुत सी जगह बर्फ के नीचे दबी रही.

वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है कि, मंदिर की दीवारों पर कटाव के निशान हैं जो ग्लेशियर की रगड खाने की वजह से बने हैं. ग्लेशियर असल में बहुत वजनदार होते हैं. अपने वजन की वजह से ही इनके रास्ते में जो भी चट्टान या पत्थर आते हैं, ग्लेशियर उन्हें काट डालते हैं.

पर्वतों की गोद में बसा है, केदारनाथ धाम.

केदारनाथ धाम पर्वतीय राज्य उत्तराखंड में है. केदारनाथ मंदिर एक दम पर्वतों के मध्य में स्थित है,जिसके आसपास करीब 6 महीने तक बर्फ ही बर्फ रहती है. केदारनाथ धाम में 5 नदियों का संगम भी है. यहां मं‍दाकिनी, मधुगंगा, क्षीरगंगा, सरस्वती और स्वर्णगौरी का नदियों का मिलन होता है. हर साल केदारनाथ धाम के दर्शन करने के लिए हजारों लोग जाते हैं.

2013 मे उत्तराखंड में आई भयानक बाढ़ में यहां करीब हजारों लोग अपनी जान गवा बैठे थे. केदारनाथ मंदिर ने भी इस बाढ़ का मुकाबला किया और इतनी भयंकर बाढ़ में भी मंदिर को कोई नुकसान नही हुआ था. 

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