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85 साल की उम्र में वोट डालने चारपाई पर पहुंची महिला, कुछ समय बाद हो गया उनका देहांत

वोट डालने का अधिकार भारत के हर उस नागरिक को है जो 18 वर्ष से ऊपर का है. हर इंसान को अपना पूरा प्रयास करना चाहिए वोट डालने के लिए.

भारत देश दुनिया का सबसे बडा लोकतंत्र है. दूसरे देशों के मुकाबले भारत के लोगों को जिंदगी जीने के लिए बहुत आजादी है. भारत एक हिंदू बहुल धर्मनिरपेक्ष देश है, जहां हर धर्म को बराबर सम्मान दिया जाता है. किसी भी देश मे इंसान का सबसे बडा पहचान पत्र होता है उसका “वोटर कार्ड”, वोट कार्ड से वो उस देश का पक्का नागरिक माना जाता है. अपने एक वोट से वो उस देश मे होने वाले चुनावों मे हिस्सा ले सकता है. वह अपनी मनमर्जी अनुसार वोट डाल सकता है अपनी पसंदीदा पार्टी या नेता को.

भारत मे वोट डालने का अधिकार तो सभी नागरिकों को है, लेकिन इसका इस्तेमाल आजतक सही ढंग से बहुत कम लोग करते आये हैं. भारत मे सबसे बडी दिक्कत यह है, की लोगों के पास वोटरकार्ड होने के बाद भी वो मतदान करने नही जाते. इसलिए भारत मे मतदान प्रतिशत बहुत कम है. यहां बहुत से लोग सरकार के कार्यों को ना देखते हुए जातीय आधार पर भी वो डालते हैं, यह अकसर भारत के ग्रामीण क्षेत्रों मे होता है. बहुत से लोग ऐसे हैं कि वो अपना वोट बेच भी देते हैं, जैसे कि जिस पार्टी ने उनको ‘पैसा दिया, वो लोग उसी पार्टी को वोट डालते हैं. बहुत से लोग ऐसे भी हैं, जो सिर्फ एक शराब की बोतल के लिए भी अपना वोट बेच देते हैं.

वोट आपकी पहचान है. वोट आपका सबसे बडा अधिकार भी है. अगर आप अपना वोट बेच दोगे तो समझिए, आपने अपना अधिक और अपनी पहचान को बेच दिया. इसलिए कभी भी अपना वोट चन्न पैसों और शराब की बोतल के लिए ना बेचें, और अपने फैसले के अनुसार ही किसी भी पार्टी को वोट डालें.

मुजफ्फरनगर की एक 85 साल की बूढ़ी महिला ने दिखाई अपने वोट की ताकत, अपने आखरी सांस पर भी वोट डाल कर दुनिया को अलविदा कह गई.

उत्तरप्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर जिले के चरथावल क्षेत्र के ग्यांना मजारा गांव निवासी 85 वर्षीय किशनी देवी जो बेहद बीमार थी. वो अपने पांव पर खडी भी नही हो सकती थी. लेकिन इसी दौरान किशनी देवी ने वोट डालने की इच्छा जाहिर की क्योंकि वो वोट डालने के लिए बहुत उत्सुक थी. उसके बाद उस महिला के बेटे ने किशनी देवी से मतदान करवाने के लिए सरपंच कंवरपाल के साथ बात की. कंवरपाल ने मतदान केंद्र पहुंच कर किशनी देवी के वोट डालने का इंतजाम करवाया. जिसके बाद किशनी देवी को उनके परिजन चारपाई पर लेटा कर ले गए और उनसे वोट करवाया.

किशनी देवी का यह वोट उनकी जिंदगी का आखरी वोट बन गया. वोट डालने के बाद ही उनकी हालत खराब हो गई, जिसके बाद उनकी हालत खराब हो गई. करीब एक घण्टे बाद किशनी देवी का देहांत हो गया. किशनी देवी का वोट डालने का जज़्बा पूरे भारतवासियों को वोट डालने के लिए प्रेरित कर गया.

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