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दोनो हाथ और एक पैर से अपाहिज शुभम ने दसवीं की सीबीएसई परीक्षा, पैर से लिखकर 79% अंकों से पास की

मजबूत इरादे और दृढ इच्छाशक्ति इंसान को दुनिया के हर काम को सफलता से पूर्ण करने में सहायता करती है. ठीक ऐसे ही इरादे अपाहिज “शुभम” के थे.

शिक्षा को भारत समेत पूरे विश्व मे कामयाबी का बडा मंत्र माना जाता है. भारत मे आज से नही हजारों साल पहले ही शिक्षा को बहुत महत्व देना शुरू कर दिया था. भारत में उस समय राजाओं का राज हुआ करते थे. राजाओं को विद्वान और ज्ञानी बनाने के लिए उनको शिक्षा दी जाती थी . शिक्षित राजा को ही उसकी प्रजा स्वीकार करती थी. ठीक वैसे ही आज के समाज मे भी आजकल शिक्षित लोगों को ही स्वीकार किया जाता है. आज कलयुग के दौर में भी पढाई बहुत जरूरी हो गई है. पढाई की जो कीमत है वो एक अपाहिज बच्चे ने भी समझी जिसके बारे मे हम आपको बताने जा रहे हैं.

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आजकल अगर किसी भी बच्चे के 10वीं या उस से बडी कक्षा मे अंक कम आ जाएं, या वो फेल हो जाये, तो उनके द्वारा आत्महत्या करने की खबरें भी सामने आने लगती हैं. लेकिन यहां एक ऐसे बच्चे ने इतिहास खडा किया, जिसको देख कर कोई भी इंसान, यह नही सोच पायेगा की वो परीक्षा मे बैठ कर लिखेगा, बल्कि अच्छे अंकों के साथ पास भो होगा. जी हां, एक शुभम नाम के दिव्यांग ने यह इतिहास खडा किया है.

शुभम के दोनो हाथ और एक टांग नही है. शुभम पैदाइशी दिव्यांग नही है बल्कि एक हादसे की वजह से उसे अपने हाथ-पैर खो देने पडे. यह सब होने के बाद भी शुभम के मजबूत इरादों ने हार नही मानी.

हाई वोल्टेज बिजली की तारों से लगा था करंट

शुभम आज से करीब 11 साल पहले मतलब 2008 में दोस्तों के साथ छत्त पर बैट-बल्ला खेल रहा था. उस दौरान खेलते समय वहां से गुजर रही हाइ वोल्टेज बीजली की तार की चपेट मे आ गया. उसके बाद शुभम का इलाज दिल्ली के सफदरजंग हस्पताल मे लगभग 3 महीने तक चला, और शुभम को बहुत सी सर्जरियों का सामना करना पडा. संक्रमण फैलने के कारण उसके दोनो हाथ और एक पैर भी काटना पडा. एक समय के लिए उसकी जिंदगी मौत से भी बदतर लगने लगी. लेकिन यहां भी शुभम ने हार नही मानी.

एक पैर से करने लगा हर प्रकार का काम

शुभम ने बहुत छोटी उम्र मे ही अपने आपको मानसिक तरीके से मजबूत कर लिया. उसने हर प्रकार के काम खाना , लैपटॉप चलाना और सबसे बडा काम उनसे पैर से लिखना सीख लिया. पैर से लिखना ही उसकी सबसे बडी कामयाबी थी. इसके बाद उसके माता-पिता ने उसको स्कूल मे भर्ती करवा दिया. शुभम 5 से लेकर 8वीं तक अच्छे नम्बरों से पहले या दूसरे नंम्बर पर आते रहे.

दसवीं कक्षा मे एक पैर से लिखते हुए प्राप्त किये 79% अंक .

शुभम ने अपनी पढाई को अच्छे ढंग से जारी रखा. उसने अपनी पढाई सीबीएसई बोर्ड से की. पहले की तरह दसवीं कक्षा की भी उसने बेहतरीन तैयारी की. अच्छी तैयारी मजबूत इरादों और कडी मेहनत की वजह से उसने 79% अंक दसवीं में हासिल किए. एक इंसान जो करीब 70% विकलांग हो जाये तो वह पढाई करने की सोच भी नही सकता, लेकिन शुभम ने हार नही मानी. 10वीं में शुभम को अंग्रेजी में 80, हिंदी में 82, गणित में 66, विज्ञान में 81 और सामाजिक विज्ञान में 81 नंबर मिले हैं।

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