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हिंदुओं के प्रमुख धाम “बाबा अमरनाथ” मे आज भी हैं 5 अनसुलझे राज, जिनके बारे में लोग नही जानते

अमरनाथ धाम हिंदुओ के प्रमुख धामों मेसे एक है, हर साल करोड़ ये ज्यादा की संख्या में श्रद्धालु वहां दर्शन करने जाते हैं

हिंदूओ के प्राचीन धार्मिक स्थल भारत समेत विदेशों में भी हैं. क्योंकि हिन्दू धर्म दुनिया का सबसे पुराना धर्म है. लेकिन मुगलों के हमलों ओर अत्याचारों ने हिंदू धर्म को बहुत कम कर दिया. भगवान महादेव को हिंदू धर्म में सबसे ऊंचा दर्जा दिया जाता है. महादेव के भारत में मुख्य 12 ज्योतिलिंग हैं. हर हिंदू भरपूर प्रयास करता है की वो इन 12 ज्योतिलिंगो के दर्शन कर पाए. इनमेसे एक मुख्य ज्योतिलिंग है “बाबा अमरनाथ धाम”. अमरनाथ धाम की यात्रा का सपना हर हिंदू देखता है.

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अमरनाथ धाम भारत के जम्मू-कश्मीर राज्य के स्थित है. सैंकड़ो सालों से यहां हिंदू पूजा अर्चना करते आ रहे हैं. लेकिन आज हिंदूओ के हिंदू बहुल देश मे, हिंदूओ को अमरनाथ यात्रा करने मे बहुत दिक्कतें आ रही हैं. वहां यात्रियों पर कश्मीरी पत्थरबाज पत्थर मारते हैं. इस्लामिक आतंकवादी यात्रियों पर बंब-ग्रेनेड हमले करते हैं. बहुत से हिंदू श्रद्धालुओं को इस्लामिक आतंकियों ने यात्रा के दौरान मार डाला. इसी वजह से हिंदुओ को यात्रा में आर्मी की सुरक्षा दी जाती है. लेकिन अमरनाथ धाम में बहुत शक्ति है, इसीलिए वहां लोग अपनी जान की परवाह ना करते हुए भी जाते हैं.

कुछ ऐसे राज भी हैं वहां जो आम लोगों को नही पता जिनके बारे मे हम बताने जा रहे हैं.

(1) माँ पार्वती को अमरता मंत्र– महादेव त्रिलोक पति थे. वे सर्वशक्तिमान और सर्वज्ञानी भी थे. महादेव ने माँ पार्वती को, इसी अमरनाथ धाम की गुफा में अमरता का मंत्र सुनाया था. इसी कारण श्रद्धालुओं की बहुत श्रद्धा है इस धाम में.

(2 सब कुछ त्याग दिया था- सनातन मान्यता के अनुसार किसी को भी अमरकथा सुनने की इजाजत नही थी. इसी कारणवश महादेव ने सब कुछ त्याग दिया था, माँ पार्वती को अमरकथा सुनाने के लिए.

(3) पहलगाम मे नंदी बैल को छोड दिया था- यात्रा के दौरान एक पडाव आता है “पहलगाम”. यह धाम से करीब 96 किलोमीटर दूरी पर स्थित है. यहां महादेव ने आराम किया था. आराम करने के बाद महादेव नंदी बैल को इसी जगह छोडकर चले गए थे.

(4) शेषनाग झील पर त्यागे सांप- आगे चलते हुए महादेव ने अपने गले से सांपो को उतारकर, झील के पास छोडदिया. इसके बाद ही इस झील का नाम शेषनाग पड गया. अपने पुत्र गणेश जी को उन्होंने महागुणस पहाड पर छोड दिया. पंचतरणी नामक स्थल पर महादेव ने अपने पांच तत्वों को भी त्याग दिया.

(5) कबूतरों का जोडा अमर हुआ- आगे जाकर महादेव ने माँ पार्वती को अमरकथा सुनाई, इस दौरान एक कबूतर के जोडे ने भी यह कथा सुनली. वो कबूतर का जोडा भी अमर हो गया. कहा जाता है कि आज भी वो कबूतर का जोडा गुफा में दिखाई देता है. इसके साथ ही गुफा के बाहर जो बर्फ होती है वो कच्ची बर्फ होती है. लेकिन जो महादेव का शिवलिंग बर्फ से बनता है वहां, वो एक दम ठोस बर्फ से बना हुआ होता है. इस रहस्य को आजतक कोई नही सुलझा पाया.

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