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जानिये क्या है CAA कानून, पाकिस्तानी और बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठियों को भारत में नागरिकता क्यों नही दी गई?

किसी समय कांग्रेसी नेता मनमोहन सिंह जी मे भी भाजपा सरकार से यह मांग की थी कि, पाकिस्तान, बांगलादेश और अफगानिस्तान के अल्पसंख्यक शरणार्थियों को जो भारत में हैं उन्हें नागरिकता दी जाए.

Image Courtesy: The Indian Express

आज पूरे भारत में CAA नामक कानून जो हाल ही में मोदी सरकार ने बनाया है उसे लेकर विरोध हो रहा है. इसका विरोध करने वाले मुस्लिम समुदाय के लोग ज्यादा हैं. इन विरोधियों को राजनीतिक पार्टियों का समर्थन भी हासिल है. लेकिन मुस्लिमों में इस बात को अफवाह की तरफ फैलाया गया है. बहुत से मुसलमानों ने बात करने पर यह बातें आमने आई हैं कि, भारत के मुसलमानों से उनकी नागरिकता छीन ली जाएगी, कुछ लोगों यह भी पता नही की CAA का क्या है, लेकिन वो भेड़चाल में है और राजनीतिक ताकतों की कठपुतली बनकर बस विरोध कर रहे हैं.

Image Courtesy: DNA India

जानिए क्या है ( CAA ) कानून और भारत पर इसका क्या असर पडने वाला है?

● इसे अंग्रेजी में Citizenship Amendment Act का नाम दिया गया है और हिंदी में इसे नारगिकता संशोधन कानून कहा जाता है.

● इस कानून में जो हिंदू,सिख, बोद्ध, ईसाई, पारसी, जैन इस धर्म के लोग जो, भारत के पड़ोसी इस्लामिक राज्यों में अल्पसंख्यक हैं, जैसे कि पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफ़ग़ानिस्तान इन देशों से प्रताडित होकर भारत में आकर शरणार्थी बनकर रह रहे हैं उन्हें नागरिकता दी जाएगी.

● भारत में जिन लोगों को नागरिकता दी गई है वो लोग अब भारत में रहकर कारोबार कर सकेंगे, नोकरियां कर सकेंगे. इन सबसे भारत की अर्थव्यवस्था को फायदा होगा.

● इस फैसले से इस्लामिक देश भारत के खिलाफ हो सकते हैं, क्योंकि मुसलमानों को नागरिकता नही दी गई. लेकिन विश्व में जितने भी ईसाई मुल्क हैं, या फिर बुद्धिष्ट मुल्क ये सब भारत का समर्थन जरूर करेंगे. मुसलमानों को नागरिकता देने का क्या कारण है पढें.

●पाकिस्तान में हिंदूओ की आबादी

  • 1931 – 15 फीसदी
  • 1941 – 14 फीसदी
  • 1951 – 1.3 फीसदी
  • 1961 – 1.4 फीसदी
  • 1981 – 1.5 फीसदी
  • 1998 – 1.6 फीसदी
  • (करीब 30 लाख)

● नोट: यह आंकड़े पाकिस्तान में 1998 हुए जनगणना के मुताबिक हैं। 1998 में जनगणना के वक्त पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी 21 लाख थी। 2017 की जनगणना के मुताबिक पाकिस्तान की कुल जनसंख्या 207 मिलियन (करीब 20 करोड़ 70 लाख) है। उसमें हिंदुओं की आबादी जस की तस बनी हुई है जो करीब 30 लाख है।

● इन आंकड़ो से साफ पता लगता है हिंदूओ समेत अल्पसंख्यक लोगों पर अत्याचार हुए, उन्हें मार गया, उनका धर्म बदला गया, उनकी लड़कियों से बलात्कार उन्हें मुसलमान बनाया गया. इसी दौरान मुसलमानों की जनसंख्या वहां बढ़ी है. तो मुसलानों को वहां कोई दिक्कत नही वो प्रताड़ित नही हुए और वो भारत में घुसपैठियों के रूप में आये जिन्हें नागरिकता इसी वजह से नही दी गई.

● पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान यह 3 देशों के संविधान में साफ- साफ लिखा गया है को इस देश का धर्म इस्लाम है. तो इस्लाम को मानने वाले मुस्लिम लोगों के पास उन्हें देश है, आजादी के बाद मुसलमानों को भी उनका देश दिया गया था जिसका नाम है “पाकिस्तान” तो वहां के मुसलमानों को नागरिकता दिए जाने का सवाल ही नही बनता.

● आंकड़ों पर ग़ौर करें तो जहाँ बांग्लादेश में 1971 के दौरान लगभग 25 % आबादी हिंदुओं की थी वहीँ अब 10% के आस पास है. वहां भी अल्पसंख्यक लोगों की जनसंख्या कम हुई है और मुसलमानों की बढ़ी है.

● ठीक ऐसे ही अफ़ग़ानिस्तान में भी हिंदू-सिखों को खत्म कर दिया गया और वहां भी आक कट्टर इस्लामिक जनसंख्या है.

इन्हीं करणों इन देशों से आये मुसलमानों को भारत की नागरिकता देने का कोई तर्क ही नही बनता था.

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