in ,

दिल्ली में भाजपा की हार के ये हैं 5 मुख्य कारण, पढ़ें जरूर

राजधानी दिल्ली में अरविंद केजरीवाल तीसरी बार सरकार बनाने में कामयाब रहे, वहीं भाजपा के पास सिर्फ 8 सीटें और कांग्रेस 0 सीट लेने के बाद भाजपा को सलाह देती हुई दिखी.

अरविंद केजरीवाल वैसे अन्ना आंदोलन में शामिल थे. अन्ना हजारे ने यह आंदोलन लोकपाल कानून लागू करवाने के लिए और देश मे भ्र्ष्टाचार को खत्म करने लिए किया था. अन्ना आंदोलन में केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री बनने का सपना लिए बैठे थे. केजरीवाल ने अन्ना हजारे के असूलों के खिलाफ जाकर राजनीतिक पार्टी बनाई जिसका नाम “आम आदमी पार्टी” रखा गया. अन्ना हजारे ने इसके बाद से केजरीवाल के साथ दूरी बना ली. अरविंद केजरीवाल ने अपने बच्चों की कसम खाई थी कि वो किसी पार्टी के साथ गठबंधन नही करेंगे. लेकिन उसके बाद बहुमत ना मिलने के बाद केजरीवाल गांधी खानदान की गोद मे जा बैठे और उस समय की सबसे भृष्ट पार्टी कांग्रेस के साथ हाथ मिलाकर सरकार बनाई. भाजपा को ज्यादा सीटें मिलने के बाद विपक्ष में बैठना पड़ा क्योंकि बहुमत नही था।

कहीं ना कहीं यह साफ होने लगा था कि “आप” कांग्रेस पार्टी की B टीम है. लेकिन बाद में केजरीवाल ने 2 महीनों के अंदर ही गठबंधन तोड़ते हुए फिरसे दिल्ली चुनाव करवाया . इस बार केजरीवाल की “आम आदमी पार्टी” को पूर्ण बहुमत मिला उनको 67 सीटों पर जीत मिली. दिल्ली में कांग्रेस को भाजपा ने नही, केजरीवाल ने 0 किया. इसके बाद 2020 में दिल्ली में “आप” फिरसे पूर्ण बहुमत मिला और विजयप्राप्त हुई. लेकिन इस बार लोगों के मन मे सवाल है कि भाजपा क्यों हार गई, क्या कारण थे जिसके बारे में हम बताने जा रहे हैं.

1. महिलाओं को मुफ्त बस-मेट्रो यात्रा, ( महिला वोटबैंक )

एक तरफ महिलाओं को भारत में मर्दों के बराबर करने के लिए उन्हें भारत की सेनाओं समेत सभी बड़े ऊंच पदों पर केंद्र सरकार लाने का प्रयास कर रही थी, लेकिन केजरीवाल ने महिलाओं को एक हिसाब से कमजोर समझते हुए, अपना महिला वोट बैंक बना लिया. केजरीवाल सरकार ने मुफ्त बस यात्रा और मेट्रो यात्रा का एलान किया, जिसमें मुफ्त बस यात्रा को चालू भी कर दिया गया. महिलाओं को मुफ्तखोरी की आदत डालकर केजरीवाल ने उन्हें कमजोर करने का काम किया. दिल्ली की महिलाएं इस समझने में नाकामयाब रही और फायदा आम आदमी पार्टी को हुआ।

2. बिजली मुफ्त मिलेगी दिल्ली वालों को

मुफ्त सफर के बाद केजरीवाल ने दिल्ली की जनता की तरफ एक और मुफ्तखोरी का पत्ता फेंका, “एलान था बिजली फ्री फ्री फ्री”. चाहे किसी परिवार की मासिक आय 5 लाख रुपये हो या 5 हजार सभी को 200 यूनिट बिजली फ्री कर दी गई. स्वभाविक था दिल्ली की जनता केजरीवाल मुफ्तखोरी वाले जाल में फंस गई. लोगों ने “आप” को वोट डाला.

3. मुफ्त पानी देने का एलान

दिल्ली में सरकार बनते ही केजरीवाल सरकार ने लोगों के पानी के बिल माफ कर दिए थे. उसके बाद पानी को एक दम सस्ते दाम पर दिया जाने लगा. यहां तक तो ठीक था लेकिन इसके बाद मुफ्त पानी देने का एलान कर दिया गया. लोगों ने इस बात का फायदा भी “आम आदमी पार्टी” को दिया. लेकिन अच्छा होता अगर केजरीवाल सरकार बहुत से घरों में जा रहे गंदे पानी को समस्या को सुलझाने के लिए पैसा लगाती.

4. शाहीनबाग धरना

यहां अपने है पांव पर कुल्हाड़ी मारी, शाहीन बाग में लोग 2 महीनों से सड़क जाम करके CAA-NRC का विरोध करने बैठे थे, इस असवैधानिक धरने में शरजील जैसे लडके भी थे, जो आसाम को भारत से काटने की बात कर रहे थे. केंद्र सरकार के पास दिल्ली पुलिस होने के बाद भी उनको नही हटाया गया, इसी वजह से राष्ट्रवादी लोग और वहां जो लोग परेशान हो रहे थे उन्होनें भाजपा के खिलाफ वोट किया, लेकिन भाजपा को लगा था कि जितना इन लोगों को दिक्कत आएगी वो “आम आदमी पार्टी” के खिलाफ होंगे लेकिन जनता ने समझा भाजपा के पास दिल्ली पुलिस है और वो इन्हें हटाने में नाकामयाब है.

5. कांग्रेस का “आप” के खिलाफ नर्म रुख

जिस कांग्रेस पार्टी पर केजरीवाल ने सबसे ज्यादा आरोप लगाए, जिस दीक्षित को आम आदमी पार्टी ने दिल्ली से बाहर किया. जिस कांग्रेस को दिल्ली में केजरीवाल ने 0 कर दिया, उस केजरीवाल के सामने गांधी खानदान समेत कांग्रेस पार्टी ने घुटने टेक दिए. कांग्रेस के इसी नर्म रुख का केजरीवाल को फायदा हुआ और आम आदमी पार्टी ने भाजपा को करारी शिकस्त दी।

कर्नाटक का श्रीनिवास गौड़ा ने दौड़ में उसैन बोल्ट के रिकार्ड को तोड़ा, केंद्रीय खेल मंत्री ने दिल्ली बुलाया

Quarantined Man Sends His Dog to Get Him Cheetos. This Is Called Ultimate Jugaad!